Friday, 5 May 2017

CURRENT BANK RATES, RR, RRR, CRR, SLR, MSF - RBI Rates

Hello Readers, These questions are related to Current RBI Bank Rates and some study notes as What is a repo rate, the reverse repo rate, CRR and SLR? क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर? Check Current Bank Rates, RR, RRR, CRR, SLR and MSF available here. You can read all General knowledge, current affairs questions and frequently asked gk questions for upsc, ssc,IBPS and all other competitive exams here.

मित्रों हमने यह तय किया है कि आप Banking Awareness Study notes के तहत आज रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे और यह पूरी तरह से जान लेंगे कि आखिर ये What is a repo rate, What is a reverse repo rate, What is a CRR and What is a SLR?, What is BANK RATE?, What is difference between CRR and SLR? क्या कहानी है। अब अगर आपकी प्रतियोगी परीक्षा में इससे सम्बन्धित  OR Monetary policy  OR Reserve Bank of India अगर कोई प्रश्न आ जाता है तो हमें पूरी उम्मीद है कि आपका वो पूछा गया प्रश्न 100 प्रतिशत सही जायेगा।



दोस्तो English माध्यम के अभ्यर्थी तो इस concept को अच्छे से समझ जाते है लेकिन हमारे Hindi भाषा के पाठक इस concept को अच्छे से नहीं समझ पाते है तो आज हमने इन हिन्दी भाषा के अभ्यर्थियों को ये topic अच्छे से सिखाने का प्रयास किया है। जो शायद आप लोगों के लिए काफी useful साबित होगा।

रेपो रेट, बैंक रेट, रिवर्स रेपो रेट (repo rate, bank rate and reverse repo rate) की शब्दावलियाँ (economics glossary) एक दूसरे से बहुत मिलती जुलती हैं। और किताबों, इन्टरनेट में जो परिभाषा (definitions) दी जाती है, उससे कुछ समझ पाना मुश्किल हो जाता है।

इस article में आप इस concept के साथ-साथ ही Latest Important Policy Rates in Indian Banking - 2016/2017 के बारे में प्रतियोगी परीक्षा के दिनांक तक लगातार अपडेट होते रहेंगे।

Candidates will check current Bank Rates, Repo Rate (RR), Reverse Repo Rate (RRR), Cash Reserve Ratio (CRR), Statutory Liquidity Ratio (SLR) and Marginal Standing Facility (MSF). As most of the candidates know that One or two questions are asked in IBPS all exams including IBPS PO, RRB and IBPS Clerk Exam etc. and SBI exams. So candidates must be aware of the current rates of the banks if they want to score higher.

Current Bank Rate, RR, RRR, CRR, SLR and MSF

So here we are providing you updated information on Current Bank Rates. These questions are very important if you want to qualify any bank exam as one or mostly two questions are asked in these exams on rate. So by visiting this page, you will stay updated with RBI Rates and increase your marks.

RBI new rates as on 29.09.2015.
Here are the Current Bank Rates:RBI keeps key repo rate unchanged at 6.25%
Daily News & Analysis Updated on-08-Feb-2017
Current RBI Monetary Policy Rates
Repo Rate 6.25%
Bank Rate 6.75%
Marginal Standing Facility (MSF) 6.75%
Cash Reserve Ratio (CRR) 4.00%
Statutory Liquidity Ratio (SLR) 20.50%

Most read article :
As of 4 October 2016, the latest Bank Rates key indicators are:
IndicatorLatest Current Rate status
Inflation7.50
Bank Rate6.75%
CRR4.00%
SLR20.75%
Repo Rate6.25%
Reverse Repo Rate5.75%
Marginal Standing facility rate6.75%

Official website:- Reserve Bank of India

Know about Repo Rate : रेपो रेट

Repo Rate in Hindi- जैसा कि आप जानते हैं कि Banks को अपने daily के काम लिए अक्सर large amount की जरूरत होती है। अक्सर यह होता है कि इसकी मियाद (duration) एक दिन से ज्यादा नहीं होती। तब बैंक केंद्रीय बैंक (Central bank) (भारत में RBI रिजर्व बैंक) से रात भर के लिए (ओवरनाइट) कर्ज (loan) लेने का विकल्प अपनाते हैं। इस loan पर Reserve Bank of India (RBI) को उन्हें जो ब्याज (interest) देना पड़ता है, उसे ही Repo Rate कहा जाता हैं। Repo Rate कम होने से Banks के लिए Reserve Bank से loan लेना सस्ता हो जाता है और तब ही Bank interest rates में भी कमी करते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा amount कर्ज के तौर पर दी जा सके। अब अगर रेपो दर में बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह होता है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना costly हो जाएगा। ऐसे में जाहिर है कि बैंक दूसरों को कर्ज देने के लिए जो ब्याज दर तय करते हैं, वह भी उन्हें बढ़ाना होगा।

असल में उधार-वुधार कमर्शियल बैंक अपनी इच्छा से देते-वेते नहीं हैं, रिज़र्व बैंक जबरदस्ती उधार लेता है उसको लोभ देकर कि ले, तुझे मैं ज्यादा ब्याज दर दूंगा जो तूने मुझे उधार दिया है , बाप जो ठहरा, दिल तो बड़ा ही होगा बेटे के लिए। उधार लेने से क्या होता है कि कमर्शियल बैंक का पैसा गया रिज़र्व बैंक के पास और बदले में गिरवी के रूप में RBI , कर्मशियल बैंक के पास अपने कुछ बांड्स (bonds) रख देता है (उतने ही मूल्य का बांड जितना का RBI ने उधार लिया है, ये बतलाने के लिए कहीं ऊँच -नीच हुई, मैं नहीं लौटा पाया तो इस कागज़ को तुम बेच लेना बाजार में, तुम्हें पैसे मिल जायेंगे, मगर ऐसा अक्सर होता नहीं है।

RBI का जब काम हो जाता है तो वह वापस ले लेता है बांड को ….(काम ख़त्म , पैसा हज़म )……... और इधर कमर्शियल बैंक RBI को दिए गए उधार से उपजे ब्याज का आनंद उठाते हैं जो उसके बाप ने ही फिक्स किये हैं। और यही ब्याज (interest) को यदि RBI ने ज्यादा कर दिया तो कमर्शियल बैंक का लोभ बढ़ गया। अपना पैसा जो उधार के रूप में RBI को दिया था वह माँगा नहीं और अधिक ब्याज दर का मजा लेते रहते हैं। मगर उन बेवकूफों को कौन समझाए कि कैश तो RBI ने ले लिया। RBI को जो काम करना था वो तो उसने कर लिया। इसलिए जब बाजार में ज्यादा तरलता हो जाती है यानी महँगाई बढ़ जाती है तो केंद्रीय बैंक महँगाई पर नियंत्रण करने के लिए तरलता घटाने के लिए रिवर्स रेपो रेट को बढ़ा देता है यानी ज्यादा ब्याज देने लगता है उस पैसे का जो उसने कमर्शियल बैंक से उधार लिया है । कैश कम या ज्यादा हो जाने से आप जानते ही हैं क्या होता है?
Repo rate is the rate at which the central bank of a country (RBI in case of India) lends money to commercial banks in the event of any shortfall of funds– Economic Times

What will happen if repo rate is increased - रेपो दर में बढ़ोतरी

रेपो दर में बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह होता है कि बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। साफ है कि बैंक हमको कर्ज देने के लिए जो ब्याज दर तय करते हैं, वह भी उन्हें बढ़ाना होगा और फलस्वरूप बाजार में तरलता घट जाती है (कब घटती है?>> जब रिज़र्व बैंक रेपो रेट बढ़ा देते हैं तो बैंकों को रिजर्व बैंक से कर्ज मिलने में मुश्किल हो जाती है और इसका बदला वे हमसे लेते हैं )
1. जनता कम लोन ले पाती है, बाजार गिर जाता है (market will fall down), पैसे की कमी हो जाती है
2. व्यवसायी कम लोन ले पायेंगे. बिज़नस का विस्तार नहीं कर पायेंगे. कोई नया इन्वेस्टमेंट (investment) नहीं होगा.
3. फिर क्या होगा? हम-आप जैसे लोग बेरोजगार ही रह जायेंगे. जो नौकरी में हैं, वो भी निकाल दिए जायेंगे.
4. आपका खर्च घट जायेगा. दो लीटर दूध के बदले आप एक ही लीटर दूध खरीदेंगे. शेविंग क्रीम के बदले साबुन से ही काम चला लेंगे.
5. कम डिमांड करेंगे (less demand)
6. और आपके कम डिमांड करने के चलते, शॉपकीपर शेविंग क्रीम का दाम घटा देंगे. मेरा मतलब सभी वस्तुओं का मूल्य गिर जायेगा.

What will happen if repo rate is decreased- रेपो दर में कमी

जब कभी रिजर्व बैंक रेपो रेट में कमी कर देता है तो कमर्शियल बैंकों को रिजर्व बैंक से कर्ज मिलने में आसानी हो जाती है और जब रेपो रेट को बढ़ा दिया जाता है, तो रिजर्व बैंक द्वारा दिया जाने वाला कर्ज महंगा हो जाता है। जैसा कि मैंने कहा कि रेपो रेट कम होने से बैंकों के लिए रिजर्व बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा और इसलिए बैंक अपनी ब्याज दरों में कमी करेंगे (किन दरों में कमी करेंगे? वही इंटरेस्ट रेट जो हम अथवा ग्राहकों को लोन लेने पर देना पड़ता है ) , ताकि ज्यादा से ज्यादा रकम कर्ज के तौर पर दी जा सके।
1. रेपो रेट घटने से बैंक सस्ती दर पर हमें लोन दे सकेंगे.
2. सस्ती दर पर लोन लेकर हम नई-नई चमकीली नैनो खरीदेंगे.
3. व्यवसायी ढेर सारा पैसा उद्योग में लगायेंगे.
4. रोजगार ज्यादा हो जायेगा.
5. हम ज्यादा डिमांड करेंगे. मॉल्स में फिजूलखर्ची करेंगे, स्टाइल में घूमेंगे.
6. अधिक डिमांड के चलते शॉपकीपर सोचेंगे कि दाम बढ़ाने का इससे अच्छा मौका कुछ नहीं हो सकता. और सभी चीजों का दाम बढ़ जायेगा.
Conclusion- रेपो रेट में कमी से अंततः वस्तुओं का मूल्य बढ़ता है अर्थात् inflation होता है.

Know about Reserve Repo Rate : रिवर्स रेपो दर

Reverse Repo Rate in Hindi- रिवर्स रेपो रेट ऊपर बताए गए Repo Rate से reverse यानि उल्टा होता है। बैंकों के पास दिन भर के कामकाज के बाद बहुत बार एक बड़ी रकम balance बच जाती है। बैंक वह रकम अपने पास रखने के बजाय Reserve Bank में रख सकते हैं, जिस पर उन्हें Reserve Bank से interest भी मिलता है। जिस दर पर यह interest मिलता है, उसे Reverse Repo Rate कहा जाता हैं। आपको बता दें कि वैसे कई बार रिजर्व बैंक को लगता है कि market में बहुत ज्यादा नकदी (Cash) हो गई है तब वह रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी कर देता है। इससे यह होता है कि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपना पैसा रिजर्व बैंक के पास रखने लगते हैं।

Know about Cash Reserve Ratio (CRR) Rate : कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर)

सभी बैंकों के लिए जरूरी होता है कि वह अपने कुल कैश रिजर्व का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास जमा रखें। कैश रिजर्व रेश्यो (Cash Reserve Ratio) वह फंड होता है, जो बैंकों को रिजर्व बैंक के पास जमा रखना होता है। जाहिर है इससे बैंकिंग सिस्टम (banking system) में नकदी घट जाती है और वह जनता को पैसे नहीं दे पाती है और पहले से बाजार में व्याप्त महँगाई घटने लगती है। इसे नकद आरक्षी अनुपात यानी कि Cash Reserve Ratio (CRR) कहते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगर किसी भी मौके पर एक साथ बहुत बड़ी संख्या में Depositor अपना पैसा withdraw करने आ जाएं तो Bank default न कर सके। आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बिना बाजार से cash कम करना चाहता है, तो वह CRR बढ़ा देता है। इससे बैंकों के पास बाजार में loan देने के लिए कम amount बचती है। वहीं CRR को घटाने से बाजार में cash की सप्लाई बढ़ जाती है। सीआरआर देश के केंद्रीय बैंक के Guidelines के अनुसार निर्धारित की जाती है।
Cash Reserve Ratio is a specified minimum fraction of the total deposits of customers, which commercial banks have to hold as reserves with the central bank.

Know about Statutory liquidity ratio (SLR) : स्टैच्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (एसएलआर)

Cash Reserve Ratio (CRR) की तरह Commercial Banks को रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार एक Fixed amount, cash, gold या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त Bonds में Investment करना होता है। इस पर रिजर्व बैंक नजर रखता है, ताकि बैंकों के उधार देने पर monitoring की जा सके। अगर सीधे शब्दों में कहा जाये तो SLR वो cash होता है जिससे बैंकों को लोन बांटने से पहले Government bonds या फिर Gold खरीदना होता है। एसएलआर में कटौती के बाद बैंक सरकारी बॉन्ड बेच सकते हैं और इस रकम का इस्तेमाल बैंक लोन बांटने में कर सकते हैं।
Statutory liquidity ratio (SLR) is the Indian government term for reserve requirement that the commercial banks in India require to maintain in the form of gold, government approved securities before providing credit to the customers. – Wikipedia

Difference between CRR and SLR

SLR का प्रयोग RBI वैसे ही करती है जैसे Repo Rate, Reverse Repo Rate, CRR etc. का करती है. CRR और SLR में फर्क सिर्फ इतना होता है कि CRR कैश के फॉर्म में RBI के पास रहती है और SLR सोने या government approved securities के रूप में. Bank द्वारा RBI के पास अधिक gold  रखने से बैंक की साख में कमी आएगी और कम रखने से उसकी साख की वृद्धि होगी. RBI जब SLR बढ़ाएगा तो बैंक के पास कम पैसे बचेंगे हमें लोन देने के लिए. बाजार में मुद्रा कम जाएगी. Inflation में कमी आयेगी.

पर exams या interview में अक्सर यह पूछा जाता है कि:-
SLR, CRR के बढ़ाने-घटाने से interest rate पर क्या प्रभाव पड़ता है?

इसे एक उदाहरण द्वारा समझते है
मानिए आपके पास Rs. 100 करोड़ हैं. आप हरि को Rs. 100 करोड़ देते हो यह कहते हुए कि एक महीने बाद मुझे Rs. 101 करोड़ लौटाना क्योंकि मैं 1% की दर पर Interest लेता हूँ (Rs. 100cr का 1 % = 1 crore —100cr+1cr=Rs. 101cr) हरि ने एक महीने बाद आपको सूद समेत सारे पैसे लौटा भी दिए।

मगर मानिए आपको देने के लिए Rs. 100 करोड़ नहीं सिर्फ Rs. 2 करोड़ ही हैं पर फिर भी आप इस Rs. 2 करोड़ से सूद के रूप में Rs. 1 करोड़ कमाना चाहते हो तो इस बार 1% interest rate से काम नहीं चलेगा। आपको इसको बढ़ा कर 50% करना होगा (क्योंकि 2cr का 50% = 1 crore—–2+1=3 cr)

ध्यान से देखें-जब आपके पास जो money थी वो Rs. 100 cr. से घटकर Rs. 2 cr. हो गयी, तो आपको लोन का interest rate बढ़ाना पड़ा (from 1% to 50%)
इसी तरह, हमारे economy में जब वस्तुओं का मूल्य price दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला जाता है तो RBI— CRR, SLR को बढ़ाता है और अंततः बैंकों के पास हमें देने के लिए कम पैसे रह जाते हैं और बैंकों में interest rate भी बढ़ा दिया जाता है ताकि हम लोन नहीं लेंगे या कम लेंगे। Money flow in the economy कम हो जायेगा.


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