Tuesday, 22 December 2015

उत्कृष्ठ परिणाम के लिए आशावादी विचार आवश्यक

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले परीक्षार्थी के सामने ढ़ेरों सवाल, चिंताएं और आशंकाएं होती हैं जिनके जवाब की तलाश में परीक्षार्थी इधर-उधर बात करता है या पूछता है। इस कारण से वह आशा और निराशा के आयामों में झूलता रहता है। मेरी आज ऐसे सभी साथियों को सुझाव है कि आपकी क्षमता और इरादों की मज़बूती को आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता है। 



किसी दूसरे के निराशाजनक अनुभव आपकी जिन्दगी में भी लागू हो, ऐसा कभी नहीं होता है। मैं अपवादों की बहस में जाए बिना बस इतना सा कहना चाहता हूँ कि आप जूते, कपड़े, अंगूठी आदि सब अपने नाप-माप से लेते हैं जो बहुत कम अवधि तक हमारे साथ रहते हैं। जब हम बहुत कम समय तक चलने वाली चीजों के लिए भी अपनी जरूरत,क्षमता और नाप को देखते हैं तो फिर जिन बातों या कामों से हमारी जिन्दगी हमेशा के लिए बेहतर बनती हो,वहां चंद निराश और निस्तेज़ लोगों की बातों/मिथ्या दावों से पूरी जिन्दगी को क्यों खराब कर लेते हैं?
एक ही बात मेरी समझ में आती है कि आशावादी विचार हमेशा प्रतियोगी के मन में रहने चाहिए। इसके लिए किसी क्रान्ति करने की जरूरत नहीं है,जरूरत बस इस सोच की है कि मैं कर सकता हूँ,मैं करके दिखा दूंगा। मुझसे पहले कितने हारे या किसने अपनी कामयाबी के लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाए आदि-आदि सबकुछ हमारे चिंतन का विषय नहीं है। सोते -जागते, उठते-बैठते मुझे केवल उनको सोचना है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी कामयाब होकर दिखाया है। आपका आत्मविश्वास डगमगाए नहीं,ये ही सबसे ज्यादा जरूरी है। लगातार और अनथक प्रयास ही उनवान देते हैं। अपने सभी प्रतियोगी साथियों से विनम्र अनुरोध है कि सिर्फ अच्छा सोचिए,आत्मविश्वास बनाकर रखिए और थोड़ा-थोड़ा ही सही मगर रोज़ पढ़िए !!! ध्यान रखिएगा कि आपकी कामयाबी व्यवस्था पर आपका विश्वास बढ़ाती है।
कामयाब बनिए-अपने लिए,अपनों के लिए और उन सब के लिए जो आपको देखकर खुद को भरोसा दिलाएंगे कि मैं भी एक दिन इनकी तरह कामयाब हो जाऊँगा !!!

हरि सिंह, (M.B.A.(FIN.),P.G.D.C.A.)
टीम प्रभारी . मेरिटमाॅक

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